अनिल शर्मा, लालढांग। हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में सड़क किनारे जंगल में बैठे गुलदार ने बाइक सवार ग्रामीणों पर झपटा मार दिया। गुलदार की दहशत से बाइक सवार नियंत्रण खो बैठे और सड़क पर गिर पड़े। हालांकि बाइक गिरते ही गुलदार जंगल की ओर भाग गया लेकिन बाइक सवार एक ग्रामीण को गंभीर चोटें आई हैं। 38 वर्षीय घायल ग्रामीण का नाम मंजीत है जो पीली पड़ाव गांव का निवासी है। जानकारी के मुताबिक बीते शनिवार की शाम दो मंजीत और चरण सिंह नाम के ग्रामीण बाइक पर सवार होकर पीलीपड़ाव से गैण्डीखाता की और जा रहे थे। तभी रास्ते में सड़क किनारे जंगल में बैठे एक गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। गुलदार की झपट से बाइक सवार नियंत्रण खो बैठे और गुलदार की दहशत से अनियंत्रित होकर नीचे गिर पड़े। सड़क पर गिरते ही दोनों ग्रामीण घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल मंजीत नाम के ग्रामीण को तत्काल श्यामपुर के नजदीक ही निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके हाथ में फ्रैक्चर की पुष्टि की। प्लास्टर और पट्टी करने के बाद ग्रामीण की छुट्टी कर दी गई। वहीं इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्राम प्रधान शशि झंडवाल ने बताया कि वन चौकी से थोड़ी दूरी पर ही गुलदार ने हमला किया लेकिन वन विभाग अनजान बन रहा है। पिछले कई दिनों से गुलदार की दहशत बनी हुई है।

श्यामपुर रेंज के रेंज अधिकारी विनय राठी ने बताया कि ग्रामीणों पर गुलदार की हमले की सूचना मिलते ही वन प्रभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। टीम ने गुलदार की तलाश की लेकिन तब तक वो जंगल में चला गया था। घायल ग्रामीण से भी बातचीत की गई। ग्रामीण के शरीर पर गुलदार के पंजों के निशान नहीं पाए गए हैं। गुलदार की दहशत के कारण सड़क पर गिरने से ग्रामीण घायल हुआ था। फिलहाल ग्रामीण की स्थिति ठीक है, प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे घर भेज दिया था।

जंगल से सटा है लालढांग और श्यामपुर क्षेत्रहरिद्वार का लालढांग और श्यामपुर क्षेत्र
वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व के जंगलों से सटा हुआ है। अक्सर यहां मानव वन्यजीव संघर्ष के मामले सामने आते रहते हैं। यहां गुलदार, बाघ और हाथी जैसे खतरनाक वन्यजीवों का खतरा मंडराता रहता है। लालढांग क्षेत्र में पूर्व में गुलदारों द्वारा ग्रामीणों पर हमले की घटनाएं घट चुकी हैं। करीब छह माह पूर्व भी लालढांग क्षेत्र में एक गुलदार आतंक का पर्याय बना हुआ था हालांकि वन विभाग की टीम ने तब पिंजरा लगाकर एक गुलदार को पहले ट्रेंकुलाइज किया और फिर उसे पकड़कर चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर भेजा था। अब एक बार फिर से गुलदार द्वारा ग्रामीण के हमले से ग्रामीणों में दहशत मच गई है।
हाथियों की समस्या का स्थाई समाधान नहीं हुआ
लालढांग क्षेत्र में भी जंगली हाथियों द्वारा न सिर्फ घरों में तोड़फोड़ की जाती है, बल्कि किसानों की फसलों तक को हाथी रौंद डालते हैं। हाथियों द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। ग्रामीणों द्वारा बार बार मांग करने के बावजूद भी वन विभाग इन हाथियों को रोक पाने में नाकाम साबित हो रहा है। फोटो

