हरिद्वार, संवाददाता। शारदीय कांवड़ मेले में देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश से भी शिवभक्त गंगाजल गंगाजल और कांवड़ लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं। नेपाल से कांवड़ियों का एक दल गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंचा। इस दल में करीब 800 कांवड़िए शामिल हैं। इन कांवड़ियों के दल में शामिल सदस्य हरकी पैड़ी से गंगाजल भरकर लंबी दूरी तय करके महाशिवरात्रि के पर्व पर नेपाल पहुंचते हैं। हरकी पैड़ी के गंगाजल से नेपाल के बारा जिले में स्थित सहसनाथ महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।धर्मनगरी हरिद्वार में शारदीय कांवड़ मेले का रंग चढ़ने लगा है। हरकी पैड़ी समेत तमाम गंगा घाटों पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम दिखाई दे रहा है। यहां पड़ोसी राज्यों ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगाजल लेने पहुंचे। नेपाल के बारा जिले से करीब 800 कांवड़ियों का विशाल दल हरिद्वार पहुंचा, जो हरकी पैड़ी से विधि विधान के साथ गंगाजल भरकर लंबी यात्रा करेगा। महाशिवरात्रि पर्व पर अपने बारा जिले में स्थित सहसनाथ महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करेगा। यह यात्रा आठ पीढ़ियों से चली आ रही आस्था का प्रतीक मानी जाती है। दल में शामिल सदस्य अनिल कुमार मंडल ने बताया कि उनके दल के सभी सदस्य बारा हजारी कापड़ा कावरसारा समुदाय से जुड़े हैं। समुदाय के लोगों के अनुसार उनकी आठ पीढ़ियां लगातार शारदीय कांवड़ यात्रा करती आ रही हैं। इस यात्रा का उद्देश्य अपने देश नेपाल सहित संपूर्ण विश्व में शांति स्थापित करना है। भगवान शिव से सम्पूर्ण विश्व को हिंदू राष्ट्र बनाने की कामना करते हैं। एक महीना पूर्व शुरू करते हैं सन्यासी जीवन नेपाल के शिवभक्तों की शारदीय कांवड़ यात्रा की तैयारी अनुशासित होती है। दल में शामिल सभी श्रद्धालु लगभग एक माह पहले ही सांसारिक सुविधाओं से दूर रहकर संन्यास जीवन का पालन शुरू कर देते हैं। इसके बाद सामूहिक रूप से नेपाल से प्रस्थान कर विभिन्न तीर्थ मार्गों से होते हुए हरिद्वार पहुंचते हैं। कई सदस्य प्रयागराज, काशी और उज्जैन जैसे प्रमुख शिवधामों की यात्रा भी करते हैं, लेकिन शारदीय कांवड़ यात्रा उनके लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है। हरिद्वार रहकर उनके द्वारा यज्ञ, पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। भगवान शिव और मां गंगा में उनकी गहरी आस्था है। यही कारण है कि समुदाय की आठवीं पीढ़ी भी अनवरत कांवड़ यात्रा पर निकली है।हरिद्वार में रहकर करते है यज्ञ, भजन और पूजा पाठदल में शामिल लोगों ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान उनका जीवन संन्यासी की तरह हो जाता है। वो संन्यासियों की तरह केवल धोती पहनते हैं। सात्विक आहार विहार के साथ भजन, यज्ञ और नियमित पूजा पाठ की जाती है। खुले आसमान के नीचे रहकर केवल प्रभु का ध्यान लगाते हैं। उन्हें सालभर शारदीय कांवड़ मेले का इंतजार रहता है। उनके दादा परदादा और उनसे भी पूर्व के पूर्वज आठ पीढ़ियों से यह परम्परा निभाते आ रहे हैं।
दल में अनिल मंडल जितेंद्र शाह, मदन प्रसाद, जनसा जनसा गिरना शाह, विश्राम प्रसाद यादव विश्राम प्रसाद यादव,शंभू चौरसिया,जग्गा ठाकुर,रमेश यादव,श्याम मंडल,बैजनाथ चौधरी यादव,संतोषी चौधरी राम चेला यादव,लाल बाबू यादव,राजदेव शाह,शर्मा मंडल,जितेंद्र शाह,धर्मेंद्र यादव रामजस यादव राम दत्त यादव,विश्राम प्रसाद यादव ,सरोज प्रसाद यादव,मिश्री लाल प्रसाद यादव और जिम्मी लाल प्रसाद यादव समेत करीब आठ सौ लोग शामिल हैं।

