अनिल शर्मा, लालढांग। भरसार विश्वविद्यालय के पर्वतीय कृषि महाविद्यालय, रानीचौरी (टिहरी गढ़वाल) में संचालित अखिल भारतीय क्षमतावान फसल अनुसंधान कार्यक्रम के अंतर्गत अनुसूचित जनजाति के कृषकों के लिए टीएसपी योजना के तहत ग्राम रसूलपुर मीठीबेरी में “क्षमतावान फसल: मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान कमलेश द्विवेदी ने की।
गोष्ठी का संचालन वैज्ञानिक अरुणिमा पालीवाल ने किया। उन्होंने कृषकों को क्षमतावान फसलों के महत्व, खेती के साथ मृदा परीक्षण की आवश्यकता तथा मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। पशु वैज्ञानिक शिखा ने उत्तम पशु आहार प्रबंधन के साथ-साथ सर्दियों में पशुओं में होने वाले रोगों, उनके उपचार, टीकाकरण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कृषि विभाग के कार्मिकों ने कृषकों को विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक विनोद जोशी ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर जोर देते हुए नैनो उर्वरकों की उपयोग विधि एवं लाभों के बारे में विस्तार से बताया। डा. अंजना चौहान ने कृषक-वैज्ञानिक संवाद के माध्यम से खेती से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की और उनके समाधान सुझाए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. एम.एस. यादव ने कृषकों को आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर योजना के अंतर्गत चयनित 50 कृषकों को छोटे कृषि यंत्र, सूक्ष्म पोषक तत्व तथा कृषि रक्षा रसायन निःशुल्क वितरित किए गए।

कार्यक्रम के समापन पर ग्राम प्रधान कमलेश द्विवेदी ने सभी वैज्ञानिकों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे कृषकों तक पहुंचे और उन्हें अधिक से अधिक लाभ मिल सके।

