हरिद्वार। उत्तरी हरिद्वार स्थित स्वतंत्र पुरीधाम आश्रम में गुरु महाराज ब्रह्मलीन महंत श्री ब्रह्मपुरी महाराज की पावन स्मृति में 38वाँ गुरु स्मृति महोत्सव एवं 38वाँ वार्षिक भंडारा श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित किया गया। शनिवार सुबह से ही श्रद्धालुओं, संत महात्माओं और स्थानीय लोगों की आश्रम में भीड़ उमड़ी रही। कार्यक्रम के दौरान संतों और भक्तों ने ब्रह्मलीन महंत श्री ब्रह्मपुरी महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वैदिक मंत्रोच्चार और भजन कीर्तन के बीच गुरु महाराज के आदर्शों और उनके समाज के प्रति योगदान को याद किया गया। इसके उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में संत महंत और श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर श्री महंत केदार पुरी महाराज ने कहा कि गुरु परंपरा सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी धरोहर है। गुरु के आशीर्वाद और उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति जीवन में सच्चे ज्ञान और शांति को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत श्री ब्रह्मपुरी महाराज का जीवन सेवा, साधना और धर्म के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा है। श्रीमहंत अन्नपूर्णापुरी ने कहा कि गुरु स्मृति महोत्सव हम सभी के लिए गुरुजनों के आदर्शों को आत्मसात करने का पावन अवसर है। ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना और आपसी सद्भाव को मजबूत करते हैं। श्री महंत देवानंद सरस्वती ने कहा कि संत समाज हमेशा मानवता, सेवा और संस्कारों का संदेश देता आया है। गुरु महाराज की स्मृति में आयोजित यह भंडारा सेवा और समर्पण की भावना को और मजबूत करता है। महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज ने कहा कि श्रीमहंत केदार पुरी महाराज सनातन धर्म की पताका को आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में आश्रम धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा को आगे बढ़ाने वाले ऐसे आयोजन समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि महाराज, श्री महंत देवानंद सरस्वती, श्री महंत महेश पुरी महाराज,दर्जाधारी ओम प्रकाश जमदग्नि,विनोद मिश्रा,प्रबंधक सोनू शर्मा,वरिष्ठ भाजपा नेता राजीव भट्ट,डॉक्टर निशित ऐरन,राकेश जमदग्नि,मनोज महंत,मनोज बिष्ट,डॉक्टर सुशील,पार्षद आकाश भाटी,पूर्व पार्षद अनिल मिश्रा,सहित अनेक संत-महात्मा और बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

