हरिद्वार, संवाददाता। मां गंगा की पावन महिमा विदेशी धरती पर भी गूंज रही है। श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने जर्मनी के फ्रैंकफर्ट की संसद में मां गंगा के महत्व पर व्याख्यान देकर इतिहास रच दिया। बीते शनिवार को फ्रैंकफर्ट की संसद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जल और जीवन सम्मेलन में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। जहां वे फ्रैंकफर्ट की संसद में भाषण देने वाले पहले भारतीय बने। तन्मय वशिष्ठ ने मां गंगा को लेकर पहली बार किसी भारतीय द्वारा फ्रैंकफर्ट की धरती पर स्वयं के द्वारा दिए गए अपने व्याख्यान को ऐतिहासिक क्षण बताया। भव्य कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के लिए वहां के सांसद राहुल कुमार समेत सभी आयोजनकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। कहा कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की जीवनरेखा हैं। मां गंगा के आशीर्वाद से ही उन्होंने इतिहास रचने का अवसर प्राप्त हुआ है। फ्रैंकफर्ट की संसद में उन्होंने गंगा की निर्मलता और अविरलता का वर्णन किया। साथ ही हरिद्वार स्थित पैड़ी से जुड़ी ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं की जानकारी भी साझा की। यह क्षण कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

फ्रैंकफर्ट के मेंबर ऑफ सिटी पार्लियामेंट राहुल कुमार के आमंत्रण पर आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर तन्मय वशिष्ठ ने आयोजकों और फ्रैंकफर्ट की संसद का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विदेशी संसद में मां गंगा पर कार्यक्रम आयोजित होना हरिद्वार और पूरे देश के लिए गौरव की बात है। तन्मय वशिष्ठ ने इसे ऐतिहासिक पल बताते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से मां गंगा और जल संरक्षण का संदेश विश्वभर तक पहुंचेगा। यह उपलब्धि न केवल श्री गंगा सभा बल्कि देश के लिए भी बड़ा सम्मान है। इस अवसर पर मुख्य रूप से फ्रैंकफर्ट के सांसद राहुल कुमार , सांसद सिल्विया कुंज़, जॉर्ज बॉक्सहाइमर, ताबियास मैनफ्रेड , उर्सुला श्मिड्ट, करिन केलरमैन, हिंदू मंदिर सभा के अध्यक्ष किशन अग्रवाल, संजय कपूर अध्यक्ष अफ़ग़ान हिंदू गुरद्वारा सभा , कश्मीरा भुट्टा अध्यक्ष रविदास गुरद्वारा , सीमा शर्मा अध्यक्ष हिंदू वाहिनी सभा , डॉ पाटी आदि उपस्थित रहे।

फ्रैंकफर्ट की धरती पर मां गंगा की महिमा का ऐतिहासिक वर्णन किया
फ्रैंकफर्ट की संसद को संबोधित करते हुए कहा कि मां गंगा हमारे लिए नदी न होकर एक दैवीय मां है। जिनका धरती पर अवतरण संपूर्ण मानवता के पालन पोषण और मोक्ष प्रदान करने के लिए हुआ है, एक हिंदू के जन्म से लेकर मृत्यु तक के सभी धार्मिक अनुष्ठान एवं धार्मिक कार्य मां गंगा के जल के बिना पूर्ण नहीं होते हैं। मां गंगा हमारे पापों को हरते हुए हमें आध्यात्मिक एवं आत्मिक रूप से शुद्ध व पवित्र करती है। जिससे हम एक सात्विक एवं संस्कारी सोच के साथ इस समाज में अपना योगदान दें, मां गंगा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ सांस्कृतिक, सामाजिक एवं देश के लिए आर्थिक महत्व भी बहुत बड़ा है, मां गंगा पूरी भारतीय सभ्यता और संस्कृति को बिना किसी भेदभाव के एक सूत्र में पिरोते हुए गोमुख से गंगासागर तक अपनी यात्रा तय करती है।पर्यावरण की दृष्टि से भी मां गंगा भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है भारत देश की कुल आबादी की लगभग 40% आबादी गंगा बेसिन में निवास करती है। इतनी बड़ी आबादी की जल की आवश्यकताओं की आपूर्ति भी मां गंगा करती है, मां गंगा के बिना भारत के अस्तित्व की कल्पना करना भी संभव है।

