नई दिल्ली। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े एक वीडियो को लेकर भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर दुष्यंत गौतम का नाम जोड़कर प्रसारित किए जा रहे कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समयसीमा के भीतर यह सामग्री नहीं हटाई जाती है तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्वयं इसे हटाने के लिए बाध्य होंगे।
मामले की सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने यह भी कहा कि यदि भविष्य में इस तरह का कोई कंटेंट दोबारा अपलोड किया जाता है तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसकी जानकारी याचिकाकर्ता को देंगे, ताकि वह आवश्यक कानूनी कदम उठा सकें।
बुधवार, सात जनवरी को हुई सुनवाई में दुष्यंत कुमार गौतम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो के जरिए याचिकाकर्ता की छवि को जानबूझकर धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इस अभियान में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट भी शामिल हैं। गौरव भाटिया ने दलील दी कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न तो जांच एजेंसियों और न ही ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही में कभी दुष्यंत गौतम का नाम सामने आया है। इसके बावजूद उन्हें इस वीडियो के कारण भारी सामाजिक और राजनीतिक बदनामी झेलनी पड़ रही है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
याचिका में बताया गया कि 24 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया गया, जिसमें झूठे और भ्रामक तरीके से दुष्यंत गौतम का नाम अंकिता भंडारी हत्याकांड से जोड़ा गया। इससे उनके खिलाफ एक गलत नैरेटिव गढ़ा गया, जो सीधे तौर पर मानहानि की श्रेणी में आता है।
दुष्यंत गौतम की ओर से यह भी कहा गया कि मामले की जांच के दौरान किसी भी एजेंसी ने उनका नाम नहीं लिया और इस प्रकरण में ट्रायल कोर्ट अपना फैसला पहले ही सुना चुकी है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा अभियान फेक न्यूज है, जिसका उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना है।
हाईकोर्ट के इस आदेश को सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और फर्जी खबरों के खिलाफ एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
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