हरिवार। हरिद्वार के बहादराबाद थाना क्षेत्र में करोड़ों रुपये के चर्चित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट एस आनंदिका हाइट्स को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। गाजियाबाद और दिल्ली के कारोबारियों की शिकायत पर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र, धमकी और संपत्ति हड़पने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वर्षों की साझेदारी और संयुक्त निवेश के बाद अब पूरी टाउनशिप
परियोजना पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।
पंकज शर्मा, अमित ढींगरा और प्रदीप ढींगरा ने एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर को शिकायत देकर बताया कि वे लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े हैं और उत्तर भारत के कई शहरों में प्रोजेक्ट विकसित कर चुके हैं। वर्ष 2013 में उनकी मुलाकात हरिद्वार के कारोबारी राकेश नागपाल से हुई थी, जो नैक्सिस इन्फ्रा, नागपाल एसोसिएट्स और नैक्सिस इन्फ्रा डेवलिंग के माध्यम से रियल एस्टेट कारोबार करते थे। आरोप है कि राकेश नागपाल ने ग्राम बढ़ेड़ी राजपूताना, तहसील रुड़की में बड़ी टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच 29 जनवरी 2014 को एक एमओयू हुआ, जिसके तहत संयुक्त रूप से आवासीय कॉलोनी, हाईराइज और लो राइज बिल्डिंग प्रोजेक्ट विकसित करने पर सहमति बनी।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उत्तराखंड में बाहरी व्यक्ति होने के कारण वे सीलिंग लिमिट से अधिक भूमि अपने नाम पर नहीं खरीद सकते थे। ऐसे में यह तय हुआ कि जमीन राकेश नागपाल के नाम पर खरीदी जाएगी लेकिन प्रोजेक्ट संयुक्त संपत्ति माना जाएगा। इसके बाद ग्राम बढ़ेड़ी राजपूताना में में एस आनंदिका हाइट्स नाम से टाउनशिप लॉन्च की गई। परियोजना में सेल्स ऑफिस, सैंपल फ्लैट, पार्क और अन्य निर्माण कार्य कराए गए तथा नक्शे भी प्राधिकरण से स्वीकृत कराए गए। बाद में वर्ष 2016 में जमीन लेकर भी दूसरा एमओयू हुआ और परियोजना का विस्तार किया गया।
आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में राकेश नागपाल के निधन के बाद पूरा मामला बदल गया। उनकी पत्नी विम्मी नागपाल, पुत्री आनंदिका नागपाल और पुत्र करण नागपाल ने कथित रूप से बेईमानी और धोखाधड़ी की नीयत से साझेदारी और एमओयू के तथ्यों को छिपाते हुए संपत्ति अपने नाम दर्ज करा ली। आरोप है कि इसके बाद पूरे प्रोजेक्ट को खुद का बताते हुए शिकायतकर्ताओं को बाहर करने की कोशिश शुरू कर दी गई।
इसके बाद 30 मार्च 2025 को ईशा पंवार के साथ मिलकर एक फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया, जिसका उद्देश्य पूरी संपत्ति और प्रोजेक्ट पर कब्जा करना था। वहीं 25 दिसंबर 2025 को भी परियोजना पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। मामले की जानकारी मिलने पर जब शिकायतकर्ताओं ने दस्तावेजों की जांच कराई तो कथित फर्जीवाड़े और नामांतरण की जानकारी सामने आई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि छह फरवरी 2026 को आरोपी पक्ष उमाकांत सैनी, एकलव्य सैनी, मुकेश राठ, संजय शर्मा और अन्य लोगों के साथ कई गाड़ियों में परियोजना स्थल पर पहुंचा। वहां मौजूद स्टाफ के साथ गाली गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। यह पूरी घटना कथित रूप से सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। आरोप लगाया कि आरोपित पक्ष प्रभावशाली लोगों से संबंध होने का दावा कर लगातार दबाव बना रहा है और करोड़ों रुपये की संपत्ति को खुर्द बुर्द करने की कोशिश की जा रही है। आरोपियों में से कुछ लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे भी चल रहे हैं, जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा है।
बहादराबाद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह ने बताया कि इस मामले में सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। दस्तावेजों, एमओयू, और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

