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उत्तरी हरिद्वार में विद्युत पोल बढ़ा रहे परेशानी

News DeskBy News DeskJanuary 8, 2026No Comments10 Mins Read
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उत्तरी हरिद्वार में खुले विद्युत बॉक्स से हादसों का डर, हटाए जाएं पुराने विद्युत पोल उत्तरी हरिद्वार में विद्युत लाइन तो अंडरग्राउंड कर दी गई लेकिन लोगों की समस्या का समाधान नहीं हुआ। कई जगहों पर सड़क पर बने विद्युत बॉक्स खुले पड़े हैं जिनसे हादसों का खतरा बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि अनियोजित तरीके से अंडरग्राउंड विद्युत लाइन डाली गई, जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। अंडरग्राउंड विद्युत लाइन डालने के दस साल बाद भी लोगों को तारों के मकड़जाल से निजात नहीं मिली है। सड़कों पर आज भी विद्युत पोल खड़े हैं, जिन पर टेलीकॉम कम्पनियों की तारों का जाल फैला हुआ है। आरोप लगाया कि सड़क के किनारे विद्युत बॉक्स बनाने की जगह रास्ते में विद्युत बॉक्स बना गए हैं, ऊंचाई कम होने के चलते बरसात में करंट फैलने का डर बना रहता है। गर्मियों में बॉक्स में आग लग जाती है और फॉल्ट ढूंढने में दिक्कत होती है। 

:::10 साल पहले बिछाई गई थी अंडरग्राउंड विद्युत तारें 

::: 40000 है उत्तरी हरिद्वार की आबादी

::: 2027 अर्द्धकुंभ मेले से पूर्व व्यवस्था बनाई जाए

हरिद्वार, सचिन कुमार। हरकी पैड़ी, गंगा घाट, मठ मंदिरों के चलते हरिद्वार घनी आबादी वाला शहर है। विश्व में अलग पहचान रखने वाले हरिद्वार में जिस अंडरग्राउंड विद्युत लाइन परियोजना को शहर की व्यवस्था सुधारने की दिशा में बड़ा कदम माना गया था। यही परियोजना आज उत्तरी हरिद्वार के लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। बोले हरिद्वार अभियान के तहत हिन्दुस्तान की टीम के साथ बातचीत के दौरान लोगों ने बताया कि साल 2016 में शहर की विद्युत लाइन को अंडरग्राउंड किया गया था। कुंभ, अर्द्धकुंभ और कांवड़ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के दौरान सड़कों पर फैले तारों के जाल से मुक्ति मिले, कुंभ में पेशवाई बिना किसी बाधा के निकल सके। लोगों का आरोप है कि अंडरग्राउंड लाइन बिछाने के करीब दस साल बाद भी न तो तारों का मकड़जाल खत्म हो पाया और न ही उनकी मुश्किलें कम हुईं। लोगों ने उत्तरी हरिद्वार के कई इलाकों में आज भी रास्ते में बने विद्युत बॉक्स खुले पड़े हैं। इन बॉक्सों के ढक्कन गायब हैं और भीतर से बिजली की नंगी तारें साफ दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन खुले बॉक्सों से हर वक्त हादसे का खतरा बना रहता है। बीएम डीएवी स्कूल के सामने वाली गली, मंडी गोविंदगढ़ धर्मशाला की गली, दुर्गानगर, रानी गली, नगली बेला जैसे कई इलाकों में स्थिति एक जैसी है। बच्चे, बुजुर्ग, श्रद्धालु और राहगीर रोज इन बॉक्सों के पास से गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से इन्हें सुरक्षित करने की जहमत नहीं उठाता। लोगों का आरोप है कि अंडरग्राउंड विद्युत लाइन अनियोजित तरीके से डाली गई। जहां सड़क किनारे बॉक्स बनने चाहिए थे, वहां रास्ते के बीच में बॉक्स बना दिए गए। कई बॉक्स इतने नीचे बना दिए गए हैं कि बरसात के मौसम में उनमें पानी भर जाता है और करंट फैलने का डर बना रहता है। गर्मियों में ओवरलोड के कारण बॉक्सों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। ऐसे में स्थानीय निवासियों के साथ ही आवारा पशुओं के भी चपेट में आने की आशंका बनी रहती है।

स्थिति यह है कि अंडरग्राउंड लाइन होने के बावजूद फॉल्ट की समस्या खत्म नहीं हुई। ओवरलोड होते ही कहीं न कहीं फॉल्ट हो जाता है और उसे ढूंढने में कई बार एक दो दिन तक लग जाते हैं। इस दौरान पूरे इलाके को बिना बिजली के रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब लाइन जमीन के नीचे है तो फॉल्ट खोजने की व्यवस्था भी उतनी ही आधुनिक और त्वरित होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं होता। सबसे हैरानी की बात यह है कि अंडरग्राउंड लाइन डालने के बावजूद सड़कों से पुराने विद्युत पोल तक नहीं हटाए गए। इन पोलों पर अब टेलीकॉम कंपनियों की तारों का ऐसा मकड़जाल फैला हुआ है, जो न केवल शहर की सुंदरता खराब करता है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है। लोगों को उम्मीद थी कि इस योजना से हरिद्वार तारों के जाल से मुक्त होगा, लेकिन आज भी हालात जस के तस बने हुए हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी समस्याएं जस की तस हैं। इसलिए उनकी मांग है कि क्षतिग्रस्त विद्युत बॉक्स की मरम्मत कराई जाए, बीच सड़क में बने बॉक्स, सुरक्षित स्थान पर बनाए जाएं और पुराने विद्युत पोल तत्काल हटाए जाएं। 

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::::::::::::::::::::::::::::::: वर्जन ::::::::::::::::::::::::::::::

1. अंडरग्राउंड लाइन डालने के बाद उम्मीद थी कि तारों और पोलों से छुटकारा मिलेगा, लेकिन दस साल बाद भी हालात वैसे ही हैं। खुले विद्युत बॉक्स हर समय डर पैदा करते हैं।

राजीव भट्ट 

2. बरसात में बॉक्सों में पानी भरने से कई बार करंट फैलने की आशंका रहती है, लेकिन विभाग की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।

विनोद मिश्रा 

3. बच्चों का बाहर खेलना भी मुश्किल हो गया है। रास्ते में खुले बॉक्स के कारण हादसे का डर बना रहता है।

प्रेम शंकर मिश्रा 

4. गर्मियों में ओवरलोड होने से आग लगने की घटनाएं हो जाती हैं। फिर फॉल्ट ढूंढने में पूरा दिन निकल जाता है। घर का कामकाज और व्यापार बुरी तरह प्रभावित होता है।

अभिजीत 

5. कई स्थानों पर तो कोने से अलग सड़क के बीचों बीच बनाए गए विद्युत बॉक्स समझ से परे हैं। इन्हें किनारे बनाया जाना चाहिए था।

अमर अरोड़ा 

6. अंडरग्राउंड लाइन के बावजूद पुराने पोल खड़े रहना योजना की विफलता को दिखाता है। पुराने पोल हटने चाहिएं। 

बलविंदर सिंह

7. वाल्मीकि चौक जैसे व्यस्त इलाके में टूटे हुए बॉक्स के फाउंडेशन से कभी भी बड़ा हादसा करा सकता है। इसकी मरम्मत कराई जाए। 

अमरीश अग्रवाल

8. टेलीकॉम कंपनियों की केबलें अभी भी झूल रहीं है। पहले बिजली की तारें परेशानी बढ़ाती थी और अब इंटरनेट की तारों का मकड़जाल। 

विकास कोहली 

9. कुंभ और अर्द्धकुंभ जैसे आयोजनों को देखते हुए सड़क किनारे बॉक्स बनाए जाएं और पुराने खंभों को हटाया जाना चाहिए। 

शैलेंद्र पाल 

10. शिकायतें करने के बावजूद केवल आश्वासन मिलते हैं, मौके पर काम नहीं होता। अधिकारियों को संज्ञान लेना चाहिए। 

राजीव जैन 

11. स्थानीय लोगों के साथ ही आवारा पशुओं के लिए भी खुले बॉक्स खतरनाक साबित हो सकते हैं। इसलिए जल्द मरम्मत करानी चाहिए। 

दीपक 

12. करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को सुविधाएं नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। खुले बॉक्स की मरम्मत और तारों का मकड़जाल हटना चाहिए।

मोहित 

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::::::::::::::::::::::::: शिकायत ::::::::::::::::::::::::::

1. कई इलाकों में विद्युत बॉक्स खुले पड़े हैं, जिनके ढक्कन तक नहीं लगाए गए।

2. सड़क के बीच और दुकानों के सामने कम ऊंचाई वाले बॉक्स बना दिए गए।

3. अंडरग्राउंड लाइन के बावजूद फॉल्ट की समस्या लगातार बनी हुई है।

4. पुराने विद्युत पोल नहीं हटाए गए, जिन पर तारों का जाल फैला है।

5. शिकायतों के बावजूद मरम्मत और सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए जा रहे।

::::::::::::::::::::::::::::::::: सुझाव :::::::::::::::::::::::::

1. सभी खुले और क्षतिग्रस्त विद्युत बॉक्सों को तुरंत सुरक्षित किया जाए।

2. बीच सड़क में बने बॉक्स हटाकर उन्हें मानकों के अनुसार किनारे शिफ्ट किया जाए।

3. 2027 अर्द्धकुंभ से पहले पुराने विद्युत पोल पूरी तरह हटाए जाएं।

4. टेलीकॉम कंपनियों की केबलों को भी चरणबद्ध तरीके से भूमिगत किया जाए।

5. अंडरग्राउंड लाइन के लिए आधुनिक फॉल्ट डिटेक्शन सिस्टम लगाया जाए, ताकि बिजली आपूर्ति जल्द बहाल हो सके।

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2027 अर्द्धकुंभ से पहले हटें पुराने विद्युत पोल

उत्तरी हरिद्वार में अंडरग्राउंड विद्युत लाइन डाले जाने के बावजूद सड़कों पर आज भी बड़ी संख्या में पुराने विद्युत पोल खड़े हैं। इन पोलों पर अब बिजली की लाइन नहीं, बल्कि विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों की तारों का मकड़जाल फैला हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अर्द्धकुंभ 2027 जैसे बड़े धार्मिक आयोजन से पहले इन पोलों को हटाना बेहद जरूरी है। लोगों का आरोप है कि अंडरग्राउंड लाइन का उद्देश्य ही शहर को तारों के जाल से मुक्त करना था, लेकिन पोल न हटाए जाने से योजना अधूरी रह गई। कई जगह तारें इतनी नीचे लटकी हैं कि वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को परेशानी होती है। अपर बाजार में दुकानों से तीन फुट दूर सड़क पर विद्युत बॉक्स स्थापित कर दिए गए हैं। यहीं से ही कुंभ पेशवाई निकलती है। ऊपर से यहां भी तारों का मकड़जाल है। बरसात और तेज हवा के दौरान इन तारों के टूटने का भी खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुराने पोल नहीं हटाए गए, तो अर्द्धकुंभ के दौरान पेशवाई में परेशानी होगी। 

वाल्मीकि चौक के पास विद्युत बॉक्स का फाउंडेशन टूटा

वाल्मीकि चौक के पास बना विद्युत बॉक्स स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है, जबकि यह भी व्यस्ततम इलाका है। यहां कोने में लगे विद्युत बॉक्स का फाउंडेशन टूट चुका है जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बॉक्स की ऊंचाई मानकों के अनुरूप नहीं है और इसकी समय समय पर मरम्मत भी नहीं की जा रही। चौक होने के कारण यहां दिनभर आवाजाही बनी रहती है। बच्चे, बुजुर्ग और राहगीर रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बॉक्स को दुरुस्त नहीं किया गया। यदि जल्द मरम्मत नहीं कराई गई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने मांग की है कि बॉक्स का फाउंडेशन मजबूत किया जाए और उसे सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए।

तारों के मकड़जाल से नहीं मिल पाई मुक्ति

अंडरग्राउंड विद्युत लाइन डालने के बाद भी उत्तरी हरिद्वार तारों के मकड़जाल से मुक्त नहीं हो सका है। सड़कों के ऊपर आज भी टेलीकॉम कंपनियों की केबलें बेतरतीब तरीके से फैली हुई हैं। कई जगह तारें झूलती नजर आती हैं, जिससे शहर की सुंदरता तो खराब होती ही है, साथ ही दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। कंपनियों के कर्मचारी पुरानी तार हटाते नहीं और जरा से दिक्कत होते ही नई तार डाल देते हैं। लोगों का कहना है कि अंडरग्राउंड लाइन का उद्देश्य सिर्फ बिजली की व्यवस्था सुधारना नहीं, बल्कि पूरे शहर को व्यवस्थित और सुंदर बनाना था। लेकिन पुराने पोल और उन पर लटकी केबलें योजना की विफलता को दर्शाती हैं। कई इलाकों में तारों के कारण बड़े वाहन फंस जाते हैं। इससे इंटरनेट और संचार सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। मांग की जा रही है कि टेलीकॉम केबलों को भी भूमिगत किया जाए।

ओवरलोड होने पर फॉल्ट खोजने में लगता है समय

अंडरग्राउंड विद्युत लाइन होने के बावजूद ओवरलोड की समस्या खत्म नहीं हुई है। जैसे ही लोड बढ़ता है, कहीं न कहीं फॉल्ट हो जाता है और बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि फॉल्ट ढूंढने में कई बार एक से दो दिन तक लग जाते हैं। इस दौरान पूरे इलाके को अंधेरे में रहना पड़ता है। लोगों का कहना है कि अंडरग्राउंड लाइन के साथ फॉल्ट डिटेक्शन की आधुनिक व्यवस्था भी होनी चाहिए थी, ताकि समस्या का तुरंत पता चल सके। लेकिन मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारियों को बॉक्स खोलकर जांच करनी पड़ती है, जिससे समय ज्यादा लगता है। गर्मियों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जब बिजली की मांग बढ़ जाती है। लंबे समय तक बिजली गुल रहने से घरेलू कामकाज, व्यापार और पढ़ाई सब प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही आग लगने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसलिए वक्त रहते उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए, ताकि आगामी गर्मियों में लोगों को परेशानी न उठानी पड़े।

:::::::::::::::::::::: क्या बोले जिम्मेदार :::::::::::::::::::::::::::

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