गीता जोशी
हरिद्वार। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान द्वारा हरिद्वार के लालढांग क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज के किसानों के लिए विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आधुनिक खेती की तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। साथ ही कई किसानों को कृषि उपकरण भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बदलते समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में भी बदलाव जरूरी है। वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, जिनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित होंगे। इससे किसानों को नई तकनीकों की जानकारी मिलेगी और वे पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगे।

कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत बीजों के चयन, फसल विविधीकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग तथा जल संरक्षण आधारित खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने किसानों की समस्याएं भी सुनीं और उनके समाधान के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। इस अवसर पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज से जुड़े बड़ी संख्या में किसानों ने कार्यक्रम में भाग लिया और आधुनिक खेती से संबंधित जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान चयनित किसानों को कृषि उपकरण वितरित किए गए, जिससे वे वैज्ञानिक पद्धति से खेती कर बेहतर उत्पादन हासिल कर सकें।
संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सके।

