पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और स्वरोजगार में अपार संभावनाएं, मुख्यमंत्री बोले- युवाओं के नवाचार से मिलेगी विकास को गति
देहरादून। उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान स्टार्टअप की संख्या करीब 700 से बढ़कर 1700 से अधिक हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘विकसित उत्तराखण्ड–यात्रा जारी है’ संवाद कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं, उद्यमियों, किसानों और नवाचारकर्ताओं की प्रतिभा विकसित उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
नियोजन विभाग और देवभूमि डायलॉग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों से संवाद किया। उन्होंने प्रतिभागियों के अनुभव और सुझाव सुने तथा उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में उत्तराखंड भी आगे बढ़ रहा है। सरकार के प्रयासों के साथ प्रदेशवासियों की मेहनत, प्रतिभा और नवाचार राज्य के विकास को नई गति दे रहे हैं।

पर्यटन और ऊर्जा में रोजगार की संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय पर्यटन और ऊर्जा को विकास के प्रमुख आधार के रूप में देखा गया था। आज पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड ने उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन इस क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं अभी भी काफी अधिक हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में भी पिछले पांच वर्षों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुई हैं। कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है और जलविद्युत उत्पादन की संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा कृषि, तकनीक और उद्योग समेत विभिन्न क्षेत्रों में नए प्रयोग कर रहे हैं। युवा न केवल अपना कारोबार खड़ा कर रहे हैं, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।

एक गाय से शुरू किया कारोबार, अब डेयरी में बढ़ाया काम
संवाद कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। चंपावत के राहुल नरियाल ने सौर ऊर्जा और बैटरी से चलने वाली कार तैयार करने की जानकारी दी। उत्तरकाशी के जयप्रकाश ने बताया कि उन्होंने एक गाय से डेयरी व्यवसाय शुरू किया था। सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने कारोबार बढ़ाया और अब उनके पास पांच बद्री गाय तथा आठ देशी गाय हैं।
पौड़ी के नवीन पटवाल ने गुच्छी मशरूम के व्यावसायिक उत्पादन के बारे में बताया। उनके प्रयासों से अन्य लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। ऊधमसिंह नगर के विकास कुमार शाह ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ स्टार्टअप चला रहे हैं और उनका कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है।
गांव लौटकर बना रहे रोजगार, औषधीय खेती से डेढ़ करोड़ से अधिक की आय
चमोली के राजेश ने गांव लौटकर रोजमेरी और अन्य हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में काम शुरू किया है। वह स्थानीय लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। चमोली के घेस क्षेत्र में डॉ. हरपाल नेगी ने कुटकी जैसी औषधीय वनस्पतियों की खेती के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया। उनके अनुसार, इस काम से 300 से अधिक लोग जुड़े हैं और सामूहिक रूप से सालाना करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं।
नैनीताल की कमला देवी ने बताया कि वह वाहनों के टायरों की मरम्मत का काम कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। सोमेश्वर के ललित खाती ने एकीकृत कृषि प्रणाली के जरिए रोजगार सृजन के प्रयासों की जानकारी दी।

जर्मनी में नर्सिंग की नौकरी, सिंगापुर से भी जुड़े उत्तराखंड के उद्यमी
मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना के तहत जर्मनी में रोजगार प्राप्त करने वाली टिहरी की सपना राणा ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग से जर्मन भाषा का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें जर्मनी में नर्सिंग के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला।
टनकपुर मूल के शैलेश ने सिंगापुर से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने बताया कि वह वहां सीवरेज जल शोधन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्होंने चंपावत के एक गांव को गोद लेकर उसके विकास में सहयोग देने की इच्छा भी जताई। वहीं, अनीता शर्मा थपलियाल ने ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
पिरूल और मोटे अनाज से तैयार हो रहे उपयोगी उत्पाद
कार्यक्रम में गीता पंत और सुमन पांथरी ने पिरूल से उपयोगी उत्पाद तैयार करने के अपने काम की जानकारी दी। महाबल नेगी ने बागवानी और कल्पना बिष्ट ने मोटे अनाज से बने उत्पादों की बेकरी के बारे में बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों, स्थानीय उत्पादों और युवाओं की प्रतिभा का उपयोग कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। सरकार का प्रयास है कि युवाओं को उद्यमिता और स्वरोजगार के लिए बेहतर अवसर मिलें, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों को भी रोजगार दे सकें।
कार्यक्रम में देवभूमि डायलॉग के संपादक रमेश भट्ट ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाले युवाओं की उपलब्धियों पर आधारित वीडियो प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर अवधूत गिरि महाराज, मीडिया सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र पंवार, प्रमुख सचिव आरके सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सी. रविशंकर, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, मनोज पंत सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

