हरिद्वार। जिले के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को गंभीर जटिलताओं से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग नई पहल करने जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में विशेष स्वास्थ्य कैंप लगाकर गर्भवती महिलाओं की जांच की जाएगी। जांच में हाई रिस्क गर्भावस्था के मामले सामने आने पर महिलाओं को समय रहते जिला अस्पताल परिसर स्थित 200 बेड के मातृ एवं शिशु अस्पताल में रेफर किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान होने वाली गंभीर जटिलताओं की समय पर पहचान कर मातृ और नवजात मृत्यु दर को कम करना है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच नहीं हो पाने के कारण कई बार गर्भावस्था में होने वाली जटिलताओं का पता प्रसव के समय चलता है। ऐसे में मां और नवजात दोनों की जान को खतरा बढ़ जाता है।
प्रस्तावित कैंप में गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच के साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि गर्भावस्था सामान्य है या महिला हाई रिस्क श्रेणी में है। गंभीर और अति गंभीर मामलों को चिन्हित कर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया जाएगा। मातृ एवं शिशु अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक इन महिलाओं की जांच और स्वास्थ्य की निगरानी करेंगे। जरूरत पड़ने पर प्रसव और अन्य जरूरी उपचार की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक हाई रिस्क गर्भावस्था की समय रहते पहचान होने से प्रसव के दौरान अचानक पैदा होने वाली गंभीर स्थिति से निपटने में आसानी होगी। महिला को पहले से ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा जा सकेगा। इससे जटिल प्रसव के मामलों में समय पर उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में ही गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग शुरू करने से गंभीर मामलों को शुरुआती स्तर पर चिन्हित किया जा सकेगा। इसके जरिए मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के साथ सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा देने की दिशा में भी मदद मिलेगी।

