विकास कुमार
हरिद्वार। हरिद्वार के डॉक्टरों ने एक बार फिर चिकित्सा सेवा और मानवता की मिसाल पेश की है। एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम ने गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची एक गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की जान बचाने में सफलता हासिल की है। महिला की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टरों की कड़ी मेहनत, बेहतर उपचार और लगातार निगरानी के बाद अब जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। खास बात यह है कि महिला का पूरा इलाज निशुल्क किया गया।

दरअसल, लक्सर निवासी प्रियंका 36 सप्ताह की गर्भवती थीं। इसी दौरान उन्हें लगातार दौरे पड़ने लगे, जिससे उनकी और गर्भ में पल रहे बच्चे की जान पर खतरा मंडराने लगा। लक्सर में प्राथमिक उपचार के बाद महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल हरिद्वार के एमसीएच विंग एनपीपीएल हॉस्पिटल रेफर किया गया।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने बिना देरी किए उपचार शुरू किया। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अनामिका शाह और क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट डॉ. आस्था सिंह की टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षित प्रसव कराया। हालांकि, प्रसव के बाद भी महिला की हालत नाजुक बनी रही, जिसके चलते उन्हें दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया।
डॉक्टरों की लगातार निगरानी और बेहतर इलाज के बाद अब राहत की खबर है। महिला और उनका नवजात बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अगले एक-दो दिनों में दोनों को अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। सबसे अहम बात यह रही कि पूरे उपचार के दौरान मरीज को निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इस सफल उपचार के बाद परिजनों ने डॉक्टरों की टीम का आभार जताया है।
गंभीर परिस्थितियों में डॉक्टरों की सूझबूझ, तत्परता और टीमवर्क ने एक परिवार की खुशियां लौटाने में अहम भूमिका निभाई। हरिद्वार के इन चिकित्सकों के प्रयास ने एक बार फिर साबित किया है कि समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलना कितना महत्वपूर्ण है।

