शस्त्र पूजन के साथ मनाया विजयादशमी उत्सव, पूर्व जिला संघचालक रोहिताश्व कुँवर चौहान ने दिया राष्ट्रसेवा का संदेश
हरिद्वार। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस और विजयादशमी के अवसर पर चाणक्य शाखा, हरिद्वार क्षेत्र की ओर से शस्त्र पूजन और भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। आर्यनगर, नंदपुरी और मयूर विहार कॉलोनी क्षेत्र में पूर्ण गणवेश में निकले स्वयंसेवकों ने अनुशासित कदमताल के साथ राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और संगठन की एकजुटता का संदेश दिया। पथ संचलन में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने भाग लिया। जगह-जगह स्थानीय लोगों ने देशभक्ति गीतों और पुष्पवर्षा के साथ स्वयंसेवकों का स्वागत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन के साथ हुआ। इसके बाद स्वयंसेवकों ने निर्धारित मार्ग पर पथ संचलन किया। पूर्ण गणवेश में एक साथ कदमताल करते स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे। विभिन्न स्थानों पर नागरिकों की ओर से किए गए स्वागत से माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और पूर्व जिला संघचालक रोहिताश्व कुँवर चौहान ने विजयादशमी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि विजयादशमी सत्य, धर्म और न्याय की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा, कर्तव्य और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करने और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने का भी पर्व है। प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्यों का निष्ठा से निर्वहन करना चाहिए।
रोहिताश्व कुँवर चौहान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, कार्यपद्धति और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संघ तथा उसके आनुषांगिक संगठनों की भूमिका पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है। सेवा, संस्कार, अनुशासन और सामाजिक समरसता को मजबूत करके ही एक सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।

उन्होंने स्वयंसेवकों से संघ के मूल भाव ‘इदं राष्ट्राय, इदं न मम’ यानी यह राष्ट्र के लिए है, मेरे लिए नहीं, को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता करने, सामाजिक एकता को मजबूत बनाने और अपने आचरण से राष्ट्रभक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करने की प्रेरणा दी।
नगर संघचालक एवं अधिवक्ता ज्ञानेश्वर ठकराल ने कार्यक्रम में उपस्थित स्वयंसेवकों और अतिथियों का आभार जताया। उन्होंने विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रत्येक स्वयंसेवक को समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से कार्य करना चाहिए। भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण के साथ सामाजिक सद्भाव और सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाना जरूरी है।
कार्यक्रम में मुख्य शिक्षक की भूमिका अमरेश कुमार ने निभाई। शाखा कार्यवाह राजेन्द्र रूहेला ने मंच का परिचय प्रस्तुत किया। डॉ. अश्वनी ने एकल गीत प्रस्तुत किया, जबकि प्रिय पराक्ष ने अमृत वचन का वाचन किया।
इस अवसर पर बस्ती प्रमुख ब्रह्मपाल, सह बस्ती प्रमुख वेदपाल, व्यवस्था प्रमुख देवी प्रसाद, पार्षद पति सतेन्द्र चौधरी, धनवीर, डॉ. सुधीर रूहेला, सतीश गोला, सतीश चौहान, सतीश गुप्ता, सतीश त्यागी, नगर संपर्क प्रमुख सुशील सैनी, अभिषेक त्यागी, पार्षद आकाश चौहान, पार्षद अनुज सिंह, प्रमोद चौहान, प्रमोद त्यागी, ब्रजकिशोर, सुभाष, होशियार सिंह, अशोक गुप्ता, अभिनव, मानस गोयल, डॉ. मोहित, उपनगर शारीरिक प्रमुख उमेश मिश्रा, नगर कार्यवाह डॉ. अनुराग, डॉ. आलोक, सत्यप्रकाश, ओमप्रकाश, विनोद शर्मा, कार्तिक, अतुल चौहान, विशाल राठौर और अरविंद सैनी सहित अनेक स्वयंसेवक एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
पथ संचलन का समापन राष्ट्रसेवा, अनुशासन, संगठनात्मक एकता और सामाजिक समरसता के संकल्प के साथ हुआ।

