गीता जोशी
हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने मगध साइबर गैंग के एक और सदस्य को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपी का नाम सागर पांडे है, जो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले का निवासी है। गैंग में शामिल इसके पांच साथियों को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। लेकिन गैंग का मुख्य सदस्य सागर पांडे पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। पूछताछ में सामने आया है कि सागर उत्तराखंड के ऋषिकेश में साइबर ठगी करता था। गैंग को फर्जी बैंक खाते यानी म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराता था और फिर भारी कमीशन लेता था। साथियों की गिरफ्तारी के बाद घबराकर उसने सबूत मिटाने की कोशिश की। अपने मोबाइल से सभी व्हाट्सएप चैट्स डिलीट कर दिए।
पुलिस के मुताबिक, हरिद्वार की श्यामपुर कोतवाली पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 35 एटीएम कार्ड, 14 बैंक पासबुक, 17 सिम कार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और 37,500 रुपये की नकदी भी बरामद की थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस को 2.75 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध डिजिटल लेनदेन के सुराग मिले और इसमें मगध साइबर गैंग का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपियों में तीन बिहार और दो हरिद्वार के रहने वाले हैं। लेकिन मुख्य सरगना पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। एसएसपी हरिद्वार ने विशेष टीम का गठन किया गया था। टीम ने डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर मगध साइबर गैंग के ऋषिकेश स्थित पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। वांछित चल रहे आरोपी सागर पाण्डेय की तलाश हेतु उप निरीक्षक देवेंद्र सिंह तोमर के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई थी। सीआईयू हरिद्वार द्वारा आरोपी के डिजिटल फुटप्रिन्टों के आधार पर ट्रेकिंग चंद्रेश्वर रोड, मायाकुंड (ऋषिकेश) प्राप्त हुई। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और काले रंग की स्कूटी पर सवार होकर जा रहे आरोपिय सागर पाण्डेय को धर दबोचा।
पूछताछ में सामने आया कि मूल रूप से ग्राम सिकंदपुर, जिला बलिया (उ०प्र०) का रहने वाला आरोपी सागर पाण्डेय ऋषिकेश में रहकर मगध साइबर गैंग के पूर्व में गिरफ्तार मुख्य सरगना कृष्णा पाण्डेय के सीधे संपर्क में था। वह स्थानीय स्तर पर पैसों का लालच देकर लोगों के नाम से बैंक खाते खुलवाता था और फिर इन खातों को साइबर ठगी की रकम मंगाने के लिए गैंग को उपलब्ध कराता था। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने विशाल और श्याम नामक व्यक्तियों के कुल 18 बैंक खाते, गैंग को मुहैया कराए थे, जिसके बदले में उसे मोटा कमीशन मिलता था।

जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद शातिर किस्म का है। उसने खुलासा किया कि जैसे ही उसे जानकारी मिली कि उसके 05 साथी पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं, उसने तुरंत अपने मोबाइल से सभी व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और साथियों के नंबर डिलीट कर दिए थे। ताकि पुलिस उस तक न पहुँच सके। हालांकि, पुलिस टीम ने उसके डिजिटल व तकनीकी जांच कर गैलरी से विशाल के नाम दर्ज एक बैंक खाते की फोटो साक्ष्य के रूप में बरामद कर ली है। इसके अलावा बैंक खातों व चैट से संबंधित रिकवर्ड डिजिटल दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
श्यामपुर थाना प्रभारी नितेश शर्मा ने बताया कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह के पांच आरोपियों को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। फरार चल रहे छठे आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट में पेश करने की तैयारी है।

