गीता जोशी।
हरिद्वार। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत लगातार एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगा रहीं हैं। उन्होंने अपनी विधानसभा में रहने वाले 838 वन गुज्जरों के नामों पर साजिशन आपत्ति लगाने का आरोप लगाया। कहा कि उनकी विधानसभा में उनके समर्थकों को टारगेट किया जा रहा है, ताकि उनके वोट काटे जा सकें। उन्होंने इसे बड़ा स्कैम बताया और लालढांग क्षेत्र में प्रेस वार्ता कर उन्होंने इस मुद्दे का पुरजोर विरोध करने की चेतावनी दी।

दरअसल हरिद्वार जिले में एसआईआर प्रक्रिया चल रही है और दस्तावेज उपलब्ध न होने या फिर मैपिंग न होने के कारण लोगों को नोटिस देकर जवाब मांगे जा रहे है। इसी बीच हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने एक बार फिर से उनकी विधानसभा में अलग अलग वन्य क्षेत्रों में रहने वाले वन गुज्जरों को जबरन और गलत नोटिस दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने लालढांग क्षेत्र में वन गुर्जरों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। विधायक अनुपमा रावत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उनकी विधानसभा के 838 वन गुज्जरों के नाम पर आपत्ति लगा दी गई है। एसआईआर प्रक्रिया में उन्हें कहा गया है कि वो यहां के वोटर ही नहीं हैं। कुछ लोग जानबूझकर इस तरह की शरारत कर रहे हैं और यह एक बहुत बड़ा स्कैम है।
बताया कि कई जगहों पर एक ही व्यक्ति, सैकड़ों नामो पर आपत्ति लगा रहा है। कई जगहों व्यक्ति खुद ही अपने नाम की आपत्ति लगा रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर गोलमाल किया गया है, और कांग्रेस इसकी जड़ तक जाएगी। उन्होंने कहा कि वन गुज्जरों के सामने एसआईआर प्रक्रिया में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सही समय पर उन्हें परिवार रजिस्टर की कॉपी और अन्य दस्तावेज नहीं दिए जा रहे हैं। नोटिस की सुनवाई की तारीख नजदीक आ गई है। यदि समय पर उन्हें दस्तावेज की नहीं मिले तो, इनके नाम कट जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनकी विधानसभा में बड़ी संख्या में वन गुर्जर निवास करते है, पीढ़ियों से एक दूसरे का दर्द साझा कर रहे हैं, इसलिए हम उनकी लड़ाई को आगे ले जाने का कार्य करेंगे। एसआईआर प्रक्रिया में किसी के साथ भी नाइंसाफी नहीं होने देंगे।

बता दे कि इससे पूर्व में कांग्रेस विधायकों ने भी जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए थे और रोशनाबाद स्थित मुख्यालय में जमकर हंगामा भी काटा था। आरोप लगाया था कि सत्ता पक्ष के दबाव में विपक्षी विधायकों के समर्थकों को परेशान किया जा रहा है, ताकि उनके वोट न बन सकें।

