हरिद्वार। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में सोमवार को जिला कार्यालय सभागार में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की अध्यक्षता में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने राजस्व, भूमि विवाद, बिजली, अतिक्रमण, जलभराव, पेयजल और राशन कार्ड समेत विभिन्न समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। कुल 88 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 45 का मौके पर निस्तारण किया गया। शेष शिकायतों को संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के लिए भेजा गया।
जनसुनवाई में हरिलोक कॉलोनी फेस-1 ज्वालापुर निवासी ओपी सिंह ने आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने और कॉलोनी की सुरक्षा दीवार तोड़कर बाहरी वाहनों के निर्बाध आवागमन की शिकायत की। उन्होंने इससे कॉलोनीवासियों की सुरक्षा को खतरा बताया। लालवाला खालसा के ग्रामीणों ने ग्राम समाज की भूमि के खसरा संख्या 88 पर अतिक्रमण की शिकायत की।
सैदपुर पंचायत कुरड़ी निवासी विद्या ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने और मकान नहीं होने की समस्या बताते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की। प्रियांशु ने बहादराबाद के बेगमपुर औद्योगिक क्षेत्र की मुख्य 60 फीट सड़क पर चार-पांच वर्षों से जलभराव, गंदगी और क्षतिग्रस्त सड़क की समस्या उठाई। वहीं रंघड़वाला निवासी रामकुमार ने वर्ष 1988-89 में आवंटित पट्टे को खतौनी में दर्ज कराने की मांग की। शिवगंगा विहार सोसाइटी, दादूपुर गोविंदपुर के क्षेत्रवासियों ने प्लास्टिक कबाड़ के अनियंत्रित भंडारण, प्लास्टिक जलाने और उससे हो रहे प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में दर्ज शिकायतों का प्राथमिकता और संवेदनशीलता के साथ समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में स्थलीय निरीक्षण की आवश्यकता है, संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय से मौके पर जाकर समस्या का समाधान करें। लापरवाही या शिथिलता मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
36 दिन से अधिक लंबित शिकायतों के निस्तारण के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान सीएम हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों की भी समीक्षा की गई। सीडीओ ने अधिकारियों को 36 दिन से अधिक समय से लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए। वर्तमान में एल-1 स्तर पर 267 और एल-2 स्तर पर 89 शिकायतें लंबित हैं। अधिकारियों को इन शिकायतों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया।

