हरिद्वार। श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण के महामंडलेश्वर करौली शंकर दास के विरूद्ध अनर्गल बयानबाजी करने के मामले में एक यू-ट्यूबर गौतम खट्टर के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। कानपुर में उनकी शिष्या प्रियंका द्विवेदी ने यह मुकदमा दर्ज कराया है। तीर्थनगरी हरिद्वार के संत समाज ने भी करौली शंकर दास के विरूद्ध अपशब्दों के प्रयोग की घोर निंदा की हैं। रविवार को कनखल स्थित श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन निर्वाण संतों की आपात बैठक में संत समाज ने मामले की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस से आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अखाड़े के मुखिया महंत भगत राम ने कहा कि नवनियुक्त म.मं. करौली शंकर दास महाराज सनातन संस्कृति और अखाड़ा परम्परा को आगे बढ़ाने का कार्य रहे हैं। उन्होंने ध्यान, योग, साधना के माध्यम से निरन्तर मानवता की सेवा का कार्य किया है। पीड़ित, वंचित व समाज के कमजोर वर्ग की सेवा में वह निरन्तर तत्पर रहते हैं ऐसे संत के खिलाफ किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार नही की जायेगी। उन्होंने कहा कि जहां संत समाज आगामी कुम्भ पर्व की तैयारियों में जुटा है। ऐसे में सनातन विरोधी ताकतें यू-ट्यूबरों व सोशल मीडिया के माध्यम से संत समाज व सनातन संस्कृति को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है, जिसे संत समाज व अखाड़े किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

अखाड़े के सचिव जगतार मुनि महाराज ने कहा कि करौली शंकर दास सदैव शांति व सद्भाव का संदेश देते हैं। उन्होंने सनातनी योग व अध्यात्म के माध्यम से मानवता के कष्टों को दूर करने का अभियान चलाया हुआ है ऐसे संतों के प्रति आदर के स्थान पर उनका अपमान करना समूचे संत समाज का अपमान है। पुलिस प्रशासन को ऐसे मामलों का स्वतः संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
बैठक में महंत दुर्गेशानंद सरस्वती, भक्त दुर्गादास, स्वामी प्रेमानन्द, नितिन दास और मौली दास, आशुतोष मुनि समेत अनेक संत उपस्थित रहे।
जानिए पूरा मामला क्या है
गौर हो कि बीती आठ अप्रैल को करौली शंकर महाराज की शिष्या प्रियंका द्विवेदी ने कानपुर में सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर गौतम खट्टर के खिलाफ कानपुर में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि गौतम खट्टर ने महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव दास महाराज के पट्टाभिषेक से जुड़ा वीडियो अपलोड कर उनके खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की। वीडियो के माध्यम से संत की छवि धूमिल कर उनके अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। लोगों को उकसाने वाले बयान दिए, जिनमें हिंसात्मक भाषा का प्रयोग भी शामिल है। साथ ही इससे समाज में अशांति और विद्वेष फैलने का खतरा है। इस मामले में कानपुर पुलिस ने धारा 299, 196 और 192 समेत कई धाराओं में गौतम खट्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। कानपुर पुलिस केस की जांच के लिए हरिद्वार भी आई थी।

