हरिद्वार। गंगनहर की वार्षिक बंदी के बाद गंगा की धारा सूखने से घाटों पर जमा कूड़ा कचरा दिखाई देने लगा है। गंगा की सतह और रेलिंग पर जगह जगह कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन नजर आ रही हैं। इससे न सिर्फ गंगाजल प्रदूषित हो रहा है बल्कि जलीय जीवों के लिए भी हानिकारक हैं। हालांकि प्रशासन और समाजसेवी संस्थाएं गंगा की साफ सफाई में जुट गई हैं। लेकिन खासकर पुराने कपड़े गंगा की स्वच्छता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

दरअसल हर वर्ष दशहरे से लेकर दीवाली तक गंगनहर का पानी रोक दिया जाता है। इस दौरान गंगा की साफ सफाई और मेंटिनेंस का कार्य किया जाता है। करोड़ों लोगों की आस्था मां गंगा से जुड़ी है। मां गंगा को मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी माना जाता है। लेकिन गंगा बंदी के पहले ही दिन हरिद्वार में इस तरह की तस्वीरें चिंता बढ़ाने वाली हैं। इस बीच ज्योतिषाचार्यों ने भी श्रद्धालुओं से गंगा में कपड़े, पॉलीथीन और अन्य गंदगी न डालने की अपील की है।
नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी और ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने कहा कि प्लास्टिक, पॉलीथिन और कपड़े पर्यावरण के लिए अभिशाप हैं। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। गंगा में स्नान और पूजा पाठ करने वाले श्रद्धालुओं को इसकी पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए। पूजा सामग्री, पुराने कपड़े, प्लास्टिक और पॉलीथीन गंगा में डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर लोगों को ऐसे काम करने के लिए प्रेरित नहीं किया जाना चाहिए, जिनसे मां गंगा प्रदूषित हों। श्रद्धालु तथाकथित धर्माचार्यों के बहकावे में न आएं और किसी भी ऐसी परंपरा का पालन न करें, जिससे गंगा की स्वच्छता को नुकसान पहुंचे। गंगा को गंदा करके कोई पुण्य नहीं मिलता, बल्कि लोग अनजाने में पाप के भागीदार बनते हैं। उन्होंने कहा कि गंगा को अगर कुछ अर्पित करना ही है तो मां गंगा में दूध चढ़ाएं और मछलियों को आटा खिलाएं लेकिन पुराने वस्त्र और अन्य प्रदूषण फैलाने वाली सामग्री न डालें। इससे पुण्य नहीं पाप के भागदार बनेंगे। मां गंगा हमारे लिए बहुत ही पूजनीय है।

वहीं मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने कहा कि गंगा बंदी के बाद स्वच्छता अभियान शुरू कर दिया गया है। इसमें कई सामाजिक संस्थाओं ने भागीदारी करने की सहमति जताई है। गंगा की स्वच्छता को जरूरी बताते हुए कहा कि नदी को साफ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। सभी नागरिकों को इसमें भागीदारी निभानी चाहिए। श्रद्धालुओं को गंगा में पुराने कपड़े डालने से बचना चाहिए। निर्धारित स्थानों पर ही पुराने कपड़े छोड़े। गंगा घाटों पर स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को जागरूक किया जा रहा है।

