समय बीतता गया, सांसे छूटती गई, पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गया मनोहर
हरिद्वार। मनोहर शुक्रवार सुबह करीब साढ़े दस बजे गड्ढे में नोजल लगाने गया और मिट्टी के नीचे दब गया। क्योंकि मनोहर पास ही के गांव का रहने वाला था, इसलिए परिजन भी तुरंत मौके पर पहुंचे। मनोहर की पत्नी, बच्चे और भाई समेत पूरा परिवार इसी आस में बैठे रहे कि मनोहर सही सलामत बाहर निकल जाए। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया, वैसे वैसे उम्मीदें भी टूटती गई। घटनास्थल पर मृतक के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। परिजनों को अनहोनी की आशंका हो गई थी इसलिए एम्बुलेंस आते ही वो एम्बुलेंस के पास बैठ गए। काफी देर तक परिजन वहीं बैठे विलाप करते रहे। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, उनकी चिंता और बेचैनी बढ़ती जा रही थी। पत्नी और दोनों बच्चे लगातार रोते हुए मनोहर के सुरक्षित सकुशल बाहर आने की दुआ कर रहे थे। आसपास खड़े लोग उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे थे। मौके पर मौजूद महिलाओं और अन्य ग्रामीणों की आंखें भी नम थीं। यह दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर दिया। परिजनों की हालत देखकर हर कोई स्तब्ध था और सभी जल्दी राहत मिलने की कामना कर रहे थे। लेकिन बाहर निकलते ही जैसे मनोहर को मेला अस्पताल भिजवाया गया, वहां डॉक्टरों द्वारा मनोहर की मौत की पुष्टि करते ही उनकी सारी उम्मीदें टूट गईं। श्यामपुर थाना प्रभारी नितेश शर्मा ने बताया कि फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। मामले की जांच की जा रही है। एसडीएम जितेंद्र कुमार के मुताबित पूरे मामले की जांच कराई जाएगी।
दस घंटे बाद निकाला बाहर, बार बार गिर रही थी मिट्टी की ढ़ांग
करीब दस घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ठेकेदार मनोहर को गड्ढे से बाहर निकाला जा सका। शुरुआत में जेसीबी मशीन से खुदाई की गई, लेकिन लगातार मिट्टी धंसने के कारण राहत बचाव कार्य में बाधा आती रही। इसके बाद पोकलैंड मशीन बुलाकर बगल में समानांतर गड्ढा खोदा गया, ताकि अंदर फंसे व्यक्ति तक सुरक्षित तरीके से पहुंचा जा सके। पोकलैंड मशीन से खुदाई के बावजूद भी करीब तेरह बार मिट्टी की ढ़ांग टूटकर गड्ढे में गिरी। जिस कारण रेस्क्यू अभियान में काफी कठिनाई हुई। रेस्क्यू टीम ने बेहद सावधानी के साथ मिट्टी हटाने का काम किया, क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही और अधिक नुकसान पहुंचा सकती थी। मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा रही और सभी की नजरें रेस्क्यू टीम पर टिकी रहीं। जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिजनों की चिंता बढ़ती गई। अंततः कई घंटों की मशक्कत के बाद टीम को सफलता मिली और मजदूर को बाहर निकाला गया। हालांकि, उसे बाहर निकालते ही मेडिकल टीम ने जांच की और मेला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
तीस सालों में हजारों नल लगा चुका था मनोहर
मनोहर सिंह अपने क्षेत्र में एक अनुभवी हैंडपंप मैकेनिक के रूप में जाना जाता था। उसने तीस वर्षों के अनुभव के साथ हजारों घरों में हैंडपंप लगाने का काम किया था। ग्रामीणों के मुताबिक, वह अपने काम में निपुण था और कठिन परिस्थितियों में भी बिना डर के गहरे गड्ढों में उतरकर काम करता था। उसकी मेहनत और लगन के चलते उसे आसपास के कई इलाकों से काम मिलता रहता था। धीरे धीरे उसने हैंडपंप लगाने का ठेका भी लेना शुरू कर दिया था। लोगों का कहना था कि उसने कई बार जोखिम भरे हालात में भी काम किया, लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया।
परिजनों और ग्रामीणों ने किया हाईवे जाम
घटना के बाद जेसीबी से गड्ढा खोदकर मनोहर को बाहर निकालने का कार्य शुरू हुआ। शाम करीब चार बजे तक जेसीबी से रेस्क्यू टीम को कामयाबी नहीं मिल सकी। इस बीच परिजन और ग्रामीण पोकलैंड मशीन मंगाने की मांग करते रहे। आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए हरिद्वार नजीबाबाद हाईवे जाम कर दिया। उनका आरोप था कि समय पर पर्याप्त मशीनें नहीं पहुंचाई गईं, जिससे रेस्क्यू में देरी हुई। कुछ देर जाम के चलते वाहनों की लाइन लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया और दस मिनट बाद अधिकारियों के समझाने पर धरने से पीछे हट गए। इसी दौरान पोकलैंड मशीन भी मौके पर पहुंच गई थी।
खुदाई करते वक्त बार-बार गिर रही थी मिट्टी की ढांग
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती बार-बार मिट्टी का धंसना रहा। जैसे ही टीम गड्ढे के पास खुदाई शुरू करती, कच्ची मिट्टी की ढांग फिर से गिरने लगती थी और गड्ढा फिर से भर जाता। मिट्टी गिरने के कारण रेस्क्यू अभियान में रुकावट आती रही। इससे न केवल रेस्क्यू में देरी हुई, बल्कि अंदर फंसे व्यक्ति तक पहुंचना और भी जोखिम भरा हो गया। बचाव दल को हर कदम बेहद सावधानी के साथ उठाना पड़ा। मिट्टी के लगातार खिसकने के कारण गड्ढे के आसपास का क्षेत्र भी धंसाव वाला हो गया था। कड़ी चुनौती के बीच दस घंटे बाद मनोहर को बाहर निकाला गया।
पत्नी और दो बच्चों को छोड़ गया मनोहर
मनोहर सिंह अपने पीछे पत्नी कुसुम और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था और उसकी आय से ही घर का खर्च चलता था। दस साल का बेटा और 17 वर्षीय बेटी अभी पढ़ाई कर रहे हैं। इस हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी का रो रोकर बुरा हाल है और बच्चों को अभी तक पूरी तरह समझ भी नहीं आ पा रहा कि उनके पिता के साथ क्या हुआ। पड़ोसी और रिश्तेदार परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन स्थिति बेहद दर्दनाक बनी हुई है। मनोहर का अचानक यूं चले जाना पूरे परिवार के लिए बड़ा झटका है। मनोहर की पत्नी चंडी देवी रोपवे में काम करती है और पति के साथ परिवार का खर्च चलाने में मदद करती है। पति के चले जाने के बाद अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

